यजुर्वेद (अध्याय 11)
उ॒त्थाय॑ बृह॒ती भ॒वोदु॑ तिष्ठ ध्रु॒वा त्वम्। मित्रै॒तां त॑ऽउ॒खां परि॑ ददा॒म्यभि॑त्याऽए॒षा मा भे॑दि ॥ (६४)
हे उखे! आप गर्त से निकल कर बड़े हों. आप स्थायी हो कर काम करें. हे मित्र देव! हम इस पवित्र बरतन को नष्ट होने के डर से आप को संपते हैं. यह टूटे नहीं. यह अच्छी तरह से कार्य करे. (६४)
Oh my god! You grow up out of the trough. You work permanently. O friend God! We associate with you for fear of destroying this holy vessel. It's not broken. It works well. (64)