यजुर्वेद (अध्याय 11)
आकू॑तिम॒ग्निं प्र॒युज॒ꣳ स्वाहा॒ मनो॑ मे॒धाम॒ग्निं प्र॒युज॒ꣳ स्वाहा॑ चि॒त्तं विज्ञा॑तम॒ग्निं प्र॒युज॒ꣳ स्वाहा॑ वा॒चो विधृ॑तिम॒ग्निं प्र॒युज॒ꣳ स्वाहा॑ प्र॒जाप॑तये॒ मन॑वे॒ स्वाहा॒ऽग्नये॑ वैश्वान॒राय॒ स्वाहा॑ ॥ (६६)
अग्नि अच्छे कामों में लगाने वाले हैं. अग्नि के लिए स्वाहा. अग्नि अच्छे कामों में मन और बुद्धि को लगाने बाले हैं. अग्नि के लिए स्वाहा. अग्नि चित्त को विशेष ज्ञान के लिए प्रेरित करते हैं. अग्नि के लिए स्वाहा. अग्निवाणी को विशेष रूप से धारण करते हैं. अग्नि के लिए स्वाहा. प्रजापति मनु देव के लिए स्वाहा. प्रजापति अग्नि के लिए स्वाहा. प्रजापति वैश्वानर के लिए स्वाहा. (६६)
Fire is going to be used in good works. Swaha for agni. Agni is the one who puts mind and intellect in good deeds. Swaha for agni. Fire inspires the mind to have special knowledge. Swaha for agni. Agnivani is specially worn. Swaha for agni. Swaha for Prajapati Manu Dev. Swaha for Prajapati Agni. For Prajapati Vaishvanar. (66)