यजुर्वेद (अध्याय 11)
मा सु भि॑त्था॒ मा सु रि॒षोऽम्ब॑ धृ॒ष्णु वी॒रय॑स्व॒ सु। अ॒ग्निश्चे॒दं क॑रिष्यथः ॥ (६८)
हे उखा देव! आप का कभी भी भेदन न हो. आप कभी भी नष्ट न हों. आप धैर्यशाली वीर, कर्तव्यपरायण हैं. हे उखा देव! आप और अग्नि इस यज्ञ कार्य को संपादित कराने की कृपा करें. (६८)
O God! You should never be pierced. You never perish. You are a patient hero, dutiful. O God! Please you and Agni to edit this yajna work. (68)