हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 12.20

अध्याय 12 → मंत्र 20 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
स॒मु॒द्रे त्वा॑ नृ॒मणा॑ऽअ॒प्स्वन्तर्नृ॒चक्षा॑ऽईधे दि॒वो अ॑ग्न॒ऽऊध॑न्। तृ॒तीये॑ त्वा॒ रज॑सि तस्थि॒वास॑म॒पामु॒पस्थे॑ महि॒षाऽअ॑वर्धन् ॥ (२०)
हे अग्नि! प्रजापति देव सब के कल्याणकारक हैं. वे आप को ईधनमय बनाते हैं. परमात्मा सवंद्रष्टा हैं. बही आप को प्रज्वलित करते हैं. आप स्वर्गलोक के स्तन जैसे हैं. आप ही सब की बढ़ोतरी करते हैं. (२०)
O agni! Prajapati Dev is the well-being of all. They make you rich. God is a savandrishta. Bookies ignite you. You are like the breast of paradise. You increase everything. (20)