यजुर्वेद (अध्याय 12)
त्वाम॑ग्ने॒ यज॑माना॒ऽअनु॒ द्यून् विश्वा॒ वसु॑ दधिरे॒ वार्या॑णि। त्वया॑ स॒ह द्रवि॑णमि॒च्छमा॑ना व्र॒जं गोम॑न्तमु॒शिजो॒ विव॑व्रुः ॥ (२८)
हे अग्नि! हम यजमान प्रतिदिन आप का अनुसरण करते हैं. यजमान आप की कृपा से सभी प्रकार के धन प्राप्त करते हैं. आप के साथ हम सभी प्रकार के धन की इच्छा करते हुए उशिजों की तरह गायों के बाड़े में चले जाएं. (२८)
O agni! We hosts follow you every day. Hosts get all kinds of money by your grace. With you, we should go to the enclosure of cows like ushijas, wishing for all kinds of money. (28)