यजुर्वेद (अध्याय 12)
अग्ने॒ यत्ते॑ दि॒वि वर्चः॑ पृथि॒व्यां यदोष॑धीष्व॒प्स्वा य॑जत्र। येना॒न्तरि॑क्षमु॒र्वात॒तन्थ॑ त्वे॒षः स भा॒नुर॑र्ण॒वो नृ॒चक्षाः॑ ॥ (४८)
हे अग्नि! आप का जो वर्चस्व स्वर्गलोक में है, बही वर्चस्व पृथ्वीलोक में है. बही वर्चस्व ओषधषियों व जलों में है. जिस से आप ने अंतरिक्ष का विस्तार किया बही यह सूर्य है. वह सभी मनुष्यों को देखने वाला है. (४८)
O agni! The supremacy that you have in heaven, the supremacy is in the earth. The book is dominated by medicines and water. It's the sun that expanded the space. He is going to see all human beings. (48)