यजुर्वेद (अध्याय 12)
अ॒यं ते॒ योनि॑र्ऋ॒त्वियो॒ यतो॑ जा॒तोऽअरो॑चथाः। तं जा॒नन्न॑ग्न॒ऽआ रो॒हाथा॑ नो वर्धया र॒यिम् ॥ (५२)
हे अग्नि! आप की यह वेदी ऋतु को जन्म देने वाली है. इसी से उत्पन्न हो कर आप चमकते हैं. आप यह जानते हुए इस पर चढ़ने की कृपा कीजिए. आप हमारे धन की बढ़ोतरी करने की कृपा कीजिए. (५२)
O agni! This altar of yours is going to give birth to the season. Born from this, you shine. Please know this and climb it. Please increase our wealth. (52)