यजुर्वेद (अध्याय 12)
अग्ने॑ऽअङ्गिरः श॒तं ते॑ सन्त्वा॒वृतः॑ सह॒स्रं॑ तऽउपा॒वृतः॑। अधा॒ पोष॑स्य॒ पोषे॑ण॒ पुन॑र्नो न॒ष्टमाकृ॑धि॒ पुन॑र्नो र॒यिमाकृ॑धि ॥ (८)
हे अग्नि! आप श्रेष्ठ अंग बाले हैं. हम आप की सैकड़ों, हजारों परिक्रमाएं करते हैं. आप हमें पोषकता देने बाला पोषण व नष्ट हुआ पशुधन और धन प्राप्त कराने की कृपा कीजिए. (८)
O agni! You are the best part. We do hundreds, thousands of orbits of you. Please give us nutrition and get destroyed livestock and money. (8)