हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 13.17

अध्याय 13 → मंत्र 17 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
प्र॒जाप॑तिष्ट्वा सादयत्व॒पां पृ॒ष्ठे स॑मु॒द्रस्येम॑न्। व्यच॑स्वतीं॒ प्रथ॑स्वतीं॒ प्रथ॑स्व पृथि॒व्यसि ॥ (१७)
प्रजापति आप को समुद्र की पीठ पर स्थापित करें. आप जल में विस्तृत होने की कृपा कीजिए. आप पृथ्वी की ही तरह विस्तृत होइए. (१७)
Prajapati install you on the back of the sea. Please be widespread in water. You expand like the earth. (17)