यजुर्वेद (अध्याय 13)
भूर॑सि॒ भूमि॑र॒स्यदि॑तिरसि वि॒श्वधा॑या॒ विश्व॑स्य॒ भुव॑नस्य ध॒र्त्री। पृ॒थि॒वीं य॑च्छ पृथि॒वीं दृ॑ꣳह पृथि॒वीं मा हि॑ꣳसीः ॥ (१८)
आप भूमि जैसी सुखदायी और विशव को धारण करने वाली अदिति हैं. आप सारे विशव की धारिका हैं. आप पृथ्वी पर अपनी कृपा कीजिए. आप उसे दृढ़ बनाइए. आप उस पर हिंसा मत होने दीजिए. (१८)
You are a land-loving and possessing beauty. You are the guardian of the whole world. You have your grace on earth. You make him strong. Don't let there be violence on him. (18)