हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 13.32

अध्याय 13 → मंत्र 32 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
म॒ही द्यौः पृ॑थि॒वी च॑ नऽ इ॒मं य॒ज्ञं मि॑मिक्षताम्। पि॒पृ॒तां नो॒ भरी॑मभिः ॥ (३२)
महान्‌ पृथ्वी और स्वर्गलोक हमारे इस यज्ञ को अपनेअपने अंशों से पूरने की कृपा करें. भरणपोषण करने वाली सामग्रियां हमारी पिपासा शांत करें. (३२)
May the great earth and heaven bless us with your own parts. Feed materials calm our thirst. (32)