हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 15.20

अध्याय 15 → मंत्र 20 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
अ॒ग्निर्मू॒र्द्धा दि॒वः क॒कुत्पतिः॑ पृथि॒व्याऽअ॒यम्। अ॒पा रेता॑सि जिन्वति ॥ (२०)
अग्नि मूर्धन्य और स्वर्गलोक के स्वामी हैं. पृथ्वी रक्षक हैं. अग्नि जल के रस को पोषित करते हैं. (२०)
Agni is the deva of the world of foolishness and heaven. Are earth protectors. They nourish the juice of agni water. (20)