यजुर्वेद (अध्याय 15)
अ॒यमु॒पर्य॒र्वाग्व॑सु॒स्तस्य॑ सेन॒जिच्च॑ सु॒षेण॑श्च सेनानीग्राम॒ण्यौ। उ॒र्वशी॑ च पू॒र्वचि॑त्तिश्चाप्स॒रसा॑वव॒स्फूर्ज॑न् हे॒तिर्वि॒द्यु॒त्प्रहे॑ति॒स्तेभ्यो॒ नमो॑ऽअस्तु॒ ते नो॑ऽवन्तु॒ ते नो॑ मृडयन्तु॒ ते यं द्वि॒ष्मो यश्च॑ नो॒ द्वेष्टि॒ तमे॑षां जम्भे॑ दध्मः ॥ (१९)
यह ऊपर मध्य दिशा में बादल देव हैं. यह देव विजेता, अच्छी सेना वाले, सेनानी, ग्राम प्रमुख व अग्रणी हैं. उर्वशी तथा पूर्वचिति इन की दो अप्सराएं हैं. गर्जना इन के शस्त्र हैं. बिजली इन का तीक्ष्ण आयुध है. अग्नि हमें सुख प्रदान करें. जो हम से द्वेष करते हैं और जिन से हम द्वेष करते हैं, उन सब को अग्नि अपने जबड़े में धारने की कृपा करें. (१९)
It is the cloud god in the middle direction above. This Dev is a winner, a good army, a fighter, a village head and a pioneer. Urvashi and Purposchit are his two nymphs. Roars are their weapons. Electricity is the sharp armament of these. May agni give us happiness. May the agni hold in your jaws to all those who hate us and those whom we hate. (19)