हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 15.31

अध्याय 15 → मंत्र 31 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
त्वां चि॑त्रश्रवस्तम॒ हव॑न्ते वि॒क्षु ज॒न्तवः॑। शो॒चिष्के॑शं पुरुप्रि॒याग्ने॑ ह॒व्याय॒ वोढ॑वे ॥ (३१)
अग्नि अद्भुत व हवि ग्रहण करने बाले हैं. सभी मनुष्यों के लिए अग्नि का आह्वान करते हैं. आप चमकीले केशों वाले हैं. आप अत्यंत प्रिय हैं. हम आप के लिए हवि वहन करते हैं. (३१)
Fire is wonderful and absorbing. Call agni to all human beings. You are bright-haired. You are extremely dear. We bear the havi for you. (31)