हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 15.55

अध्याय 15 → मंत्र 55 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
येन॒ वह॑सि स॒हस्रं॒ येना॑ग्ने सर्ववेद॒सम्। तेने॒मं य॒ज्ञं नो॑ नय॒ स्वर्दे॒वेषु॒ गन्त॑वे ॥ (५५)
हे अग्नि! जिस से आप हजार गुने हो जाते हैं, जिस से आप सब कुछ के ज्ञाता हो जाते हैं, आप उसी से हमारे इस यज्ञ में पधारिए और सभी देवों को लाने की कृपा कीजिए. (५५)
O agni! By which you become a thousand times, by which you become the knower of everything, you come to our yagna from that and please bring all the gods. (55)