यजुर्वेद (अध्याय 15)
अ॒यं ते॒ योनि॑र्ऋ॒त्वियो॒ यतो॑ जा॒तोऽअरो॑चथाः। तं जा॒नन्न॑ग्न॒ऽआ रो॒हाथा॑ नो वर्धया र॒यिम् ॥ (५६)
हे अग्नि! यह आप का मूल स्थान है. इस से यजमान ऋतुकाल के कर्मो के लिए जागते हैं. आप उन को जान कर आरोहण करने व हमारे धन की बढ़ोतरी करने की कृपा कीजिए. (५६)
O agni! This is your native place. With this, the host wakes up to the deeds of the season. Please know them and increase our wealth. (56)