यजुर्वेद (अध्याय 16)
इ॒मा रु॒द्राय॑ त॒वसे॑ कप॒र्दिने॑ क्ष॒यद्वी॑राय॒ प्र भ॑रामहे म॒तीः। यथा॒ श॑मसद् द्वि॒पदे॒ चतु॑ष्पदे॒ विश्वं॑ पु॒ष्टं ग्रामे॑ऽअ॒स्मिन्न॑नातु॒रम् ॥ (४८)
हम यजमान अपनी बुद्धि रद्र देव को अर्पित करते हैं. वे वीरों के प्रेरक व अति बलवान हैं. जैसे दोपायों और चौपायों के शांत रहने से गांब शांत रहते हैं, वैसे ही हम सब के शांत और चिंता मुक्त रहने से हमारे गांव भी शांतिमय रहें. (४८)
We hosts offer our wisdom to Rudra Dev. They are inspiring and very strong of heroes. Just as the dome remains calm due to the silence of the couplets and chaupayas, so our villages should also remain peaceful due to the silence and anxiety-free of all of us. (48)