यजुर्वेद (अध्याय 16)
विकि॑रिद्र॒ विलो॑हित॒ नम॑स्तेऽअस्तु भगवः। यास्ते॑ स॒हस्र॑ꣳ हे॒तयो॒ऽन्य॑म॒स्मन्नि व॑पन्तु॒ ताः ॥ (५२)
हे रुद्र देव! आप उपद्रवनाशी हैं. आप शुद्ध स्वरूप हैं. आप हमें भाग्यवान बनाइए. आप को नमस्कार. आप के हजारों अस्त्र हमारे हित साधक हों. वे अस्त्र अन्यों (दुश्मनों) पर पड़ें. (५२)
O Rudra Dev! You are a nuisance. You are pure format. You make us lucky. Hello to you. Thousands of your weapons are our interests. Those weapons fall on others (enemies). (52)