हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 16.6

अध्याय 16 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
अ॒सौ यस्ता॒म्रोऽअ॑रु॒णऽउ॒त ब॒भ्रुः सु॑म॒ङ्गलः॑। ये चै॑नꣳ रु॒द्राऽअ॒भितो॑ दि॒क्षु श्रि॒ताः स॑हस्र॒शोऽवै॑षा हेड॑ऽईमहे ॥ (६)
यह सर्वप्रथम तांबे जैसे रंग का होता है. फिर अरुण (लाल) रंग का और उस के बाद भूरे रंग का हो जाता है. ये जो रुद्र देव हैं इन की शक्तियां विभिन्न दिशाओं में फैली हुई हैं. सूर्य की हजारों किरणों की तरह इन की हजारों शक्तियां हैं. हम इन रूद्र देव को नमस्कार करते हैं और अपने प्रति उन की प्रशंसा चाहते हैं. (६)
It is first of all copper-like color. Then Arun (red) becomes colored and then brown. The powers of these rudra devas are spread in different directions. Like thousands of rays of the sun, they have thousands of powers. We salute these Rudra Devas and seek their praise towards us. (6)