यजुर्वेद (अध्याय 17)
अ॒ग्निस्ति॒ग्मेन॑ शो॒चिषा॒ यास॒द्विश्वं॒ न्यत्रिण॑म्। अ॒ग्निर्नो॑ वनते र॒यिम् ॥ (१६)
हे अग्नि! आप की ज्चालाएं शुचिपूर्ण (पवित्र) हैं. हे अग्नि! आप को ज्चालाएं सारे विशव का कल्याण करने वाली हैं. अग्नि हमें धन प्रदान करने की कृपा करें. (१६)
O agni! Your actions are pure. O agni! You are going to benefit all the worlds. May Agni give us wealth. (16)