यजुर्वेद (अध्याय 17)
तऽआय॑जन्त॒ द्रवि॑ण॒ꣳ सम॑स्मा॒ऽऋष॑यः॒ पूर्वे॑ जरि॒तारो॒ न भू॒ना। अ॒सूर्त्ते॒ सूर्त्ते॒ रज॑सि निष॒त्ते ये भू॒तानि॑ स॒मकृ॒॑ण्वन्नि॒मानि॑ ॥ (२८)
उस परमेश्वर ने सब को जना, सभी धनों को उपजाया. समस्त ऋषिगण जिस की उपासना करते हैं. यज्ञ में संपूर्ण वैभव जिसे समर्पित करते हैं, वह परमेश्वर अप्रत्यक्ष रूप से सब में निवास करता है. (२८)
That God made everyone aware, he created all the riches. Whom all the sages worship. The God to whom we dedicate all the splendor in the yajna indirectly resides in all. (28)