हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 17.32

अध्याय 17 → मंत्र 32 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
वि॒श्वक॑र्मा॒ ह्यज॑निष्ट दे॒वऽआदिद् ग॑न्ध॒र्वोऽअ॑भवद् द्वि॒तीयः॑। तृ॒तीयः॑ पि॒ता ज॑नि॒तौष॑धीनाम॒पां गर्भं॒ व्यदधात् पुरु॒त्रा ॥ (३२)
सर्वप्रथम विश्व का निर्माण करने वाले देवता पृथ्वी पर आए. तत्पश्चात पृथ्वी पर आदि गंधर्व हुए. पृथ्वी पालक ओषधियों में जल उपजाने वाले तीसरे क्रम में हुए, प्रथम रक्षक सभी जलों के गर्भ को विविध रूपों में धारता है. (३२)
The gods who created the world first came to earth. After that, there were early Gandharvas on earth. The earth is in the third order of water growing in spinach medicines, the first protector holds the womb of all water in various forms. (32)