यजुर्वेद (अध्याय 17)
सऽइषु॑हस्तैः॒ स नि॑ष॒ङ्गिभि॑र्व॒शी सꣳस्र॑ष्टा॒ स युध॒ऽइन्द्रो॑ ग॒णेन॑। स॒ꣳसृ॒ष्ट॒जित् सो॑म॒पा बा॑हुश॒र्ध्युग्रध॑न्वा॒ प्रति॑हिताभि॒रस्ता॑ ॥ (३५)
इंद्र देव हाथ में बाणधारी हैं. वे वीरों को संगठित करने वाले, संगठित शत्रुओं को भी जीतने वाले व सोमपायी हैं. शत्रु पर बाण प्रहरी, उग्र व धनुषधारी हैं. वे हमारी रक्षा करने की कृपा करें. (३५)
Indra Dev is an arrow in his hand. They are the ones who organize the heroes, the one who conquers the organized enemies. Arrows on the enemy are sentinels, fierce and bowed. Please protect us. (35)