हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 17.52

अध्याय 17 → मंत्र 52 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
यस्य॑ कु॒र्मो गृ॒हे ह॒विस्तम॑ग्ने वर्द्धया॒ त्वम्। तस्मै॑ दे॒वाऽअधि॑ब्रुवन्न॒यं च॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॑ ॥ (५२)
हे अग्नि! हम जिस के घर पर यज्ञ कर्म करते हैं, उन को हवि प्रदान करते हैं, आप उस की बढ़ोतरी करने की कृपा कीजिए. सभी देवता उस का वर्चस्व स्वीकारें. सभी ब्रह्मज्ञान के स्वामी हो जाएं. (५२)
O agni! Please increase the amount to the person at whose house we perform yajna karma. All gods accept his supremacy. May all become masters of Brahmgyan. (52)