यजुर्वेद (अध्याय 17)
उ॒द्ग्रा॒भं च॑ निग्रा॒भं च॒ ब्रह्म॑ दे॒वाऽअ॑वीवृधन्। अधा॑ स॒पत्ना॑निन्द्रा॒ग्नी मे॑ विषू॒चीना॒न् व्यस्यताम् ॥ (६४)
हे इंद्र देव! हे अग्नि! आप ब्रह्मज्ञान की बढ़ोतरी कीजिए. आप श्रेष्ठ कर्म करने वालों का उच्च मार्ग प्रशस्त कीजिए. आप हमारे शत्रुओं का सर्वनाश कीजिए. (६४)
O Lord Indra! O agni! Increase the knowledge of Brahman. Pave the way for those who do the best deeds. You destroy our enemies. (64)