हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 17.7

अध्याय 17 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
अ॒पामि॒दं न्यय॑नꣳ समु॒द्रस्य॑ नि॒वेश॑नम्। अ॒न्याँस्ते॑ऽअ॒स्मत्त॑पन्तु हे॒तयः॑ पाव॒कोऽअ॒स्मभ्य॑ꣳ शि॒वो भ॑व ॥ (७)
यह अग्नि जल के आश्रय समुद्र के घर में रहते हैं. आप हमारे शत्रुओं को तपाइए. आप हमारे इस यज्ञ को पवित्र व कल्याणकारी बनाइए. (७)
It lives in the shelter of agni water in the house of the sea. You tap our enemies. You make this yajna of ours sacred and welfare. (7)