यजुर्वेद (अध्याय 17)
स॒मु॒द्रादू॒र्मिर्मधु॑माँ॒२ऽउदा॑र॒दुपा॒शुना॒ सम॑मृत॒त्वमा॑नट्। घृ॒तस्य॒ नाम॒ गुह्यं॒ यदस्ति॑ जि॒ह्वा दे॒वाना॑म॒मृत॑स्य॒ नाभिः॑ ॥ (८९)
घी जैसा समुद्र है. उस में मधुर लहरें उमड़ रही हैं. ये लहरें अग्नि से एकमेक हो जाती हैं. घी का जो गुप्त नाम है, वह देवों की जिह्वा है. गुप्त नाम अमृत की नाभि है. (८९)
There is a sea like ghee. Sweet waves are rising in it. These waves become one with agni. The secret name of ghee is the tongue of the gods. The secret name is the navel of nectar. (89)