यजुर्वेद (अध्याय 17)
स नः॑ पावक दीदि॒वोऽग्ने दे॒वाँ२ऽइ॒हा व॑ह। उप॑ य॒ज्ञꣳ ह॒विश्च॑ नः ॥ (९)
हे अग्नि! आप पवित्र बनाने वाले हैं. स्वर्गलोक को दीप्तिमय बनाते हैं. आप यहां देवों का आह्वान कीजिए. यज्ञ के समीप विराजने व उन के पास इस हवि को पहुंचाने की कृपा कीजिए. (९)
O agni! You are going to make you holy. Make heaven bright. You invoke the gods here. Please take this havi to the yajna and bring it to them. (9)