हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 18.39

अध्याय 18 → मंत्र 39 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
स॒ꣳहि॒तो वि॒श्वसा॑मा॒ सूर्यो॑ गन्ध॒र्वस्तस्य॒ मरी॑चयोऽप्स॒रस॑ऽआ॒युवो॒ नाम॑। स न॑ऽइ॒दं ब्रह्म॑ क्ष॒त्रं पा॑तु॒ तस्मै॒ स्वाहा॒ वाट् ताभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ (३९)
सामवेद की सुंदर ऋचाओं से जिन की स्तुति की जाती है, जो दिन और रात को मिलाते हैं, जिन की किरणें गंधर्व की अप्सराएं हैं, वे हमारी रक्षा करें. वह सूर्य ब्राह्मणों व क्षत्रियो की रक्षा करें. उन के लिए यह आहुति है. उन के लिए स्वाहा. उन के लिए स्नेहपूर्वक आहुति अर्पित है. (३९)
Those who are praised with the beautiful richas of Samaveda, who mix day and night, whose rays are the nymphs of Gandharva, they should protect us. May the sun protect Brahmins and Kshatriyas. It is an offering for them. Swaha for them. Offer affectionately to them. (39)