यजुर्वेद (अध्याय 18)
भु॒ज्युः सु॑प॒र्णो य॒ज्ञो ग॑न्ध॒र्वस्तस्य॒ दक्षि॑णाऽअप्स॒रस॑ स्ता॒वा नाम॑। स न॑ऽइ॒दं ब्रह्म॑ क्ष॒त्रं पा॑तु॒ तस्मै॒ स्वाहा॒ वाट् ताभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ (४२)
गंधर्व सुपर्ण रूप व यज्ञ स्वरूप हैं. भोज्य पदार्थो के दाता हैं. गंधर्व ब्राह्मणों व क्षत्रियो की रक्षा करने की कृपा करें. स्तुति नामक दक्षिणा यज्ञ की अप्सरा हैं. उन के लिए यह आहुति समर्पित है. उन के लिए स्वाहा. (४२)
Gandharva is a form of sacrifice and sacrifice. They are the givers of food items. Please protect Gandharva Brahmins and Kshatriyas. Dakshina, called Stuti, is the nymph of the yajna. This sacrifice is dedicated to them. For them. (42)