यजुर्वेद (अध्याय 18)
इ॒षि॒रो वि॒श्वव्य॑चा॒ वातो॑ गन्ध॒र्वस्तस्यापो॑ऽअप्स॒रस॒ऽऊर्जो॒ नाम॑। स न॑ऽइ॒दं ब्रह्म॑ क्ष॒त्रं पा॑तु॒ तस्मै॒ स्वाहा॒ वाट् ताभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ (४१)
गंधर्व वायु स्वरूप हैं. वे भूमि को धारण करने बाले हैं. यह भूमि सर्वव्यापक है. वे गंधर्व शीघ्र गमनशील ऊर्जस्वी हैं. उन से निवेदन है कि वे ब्राह्मणों व क्षत्रियों की रक्षा करें. उन के लिए स्वाहा. जल उन की अप्सराएं हैं. वे हमारी रक्षा करने की कृपा करें. उन के लिए स्वाहा. (४१)
Gandharvas are air forms. They are the ones who hold the land. This land is ubiquitous. Those Gandharvas are quick transiting energy. They are requested to protect Brahmins and Kshatriyas. Swaha for them. Water is their nymphs. Please protect us. Swaha for them. (41)