यजुर्वेद (अध्याय 18)
व॒यं ते॑ऽअ॒द्य र॑रि॒मा हि काम॑मुत्ता॒नह॑स्ता॒ नम॑सोप॒सद्य॑। यजि॑ष्ठेन॒ मन॑सा यक्षि दे॒वानस्रे॑धता॒ मन्म॑ना॒ विप्रो॑ऽअग्ने ॥ (७५)
हे अग्नि! हम सब नमस्कार कर के आज आप के पास पहुंचते हैं. हम हाथ ऊंचे कर के आप को नमस्कार करते हैं. हम यज्ञ में दत्तचित्त हैं. हम मन से आप को हवि भेंट करते हैं. आप इस हवि को ब्राह्णगणों तक पहुंचाने की कृपा कीजिए. (७५)
O agni! We all reach out to you today by greeting. We greet you with our hands held high. We are dattachitta in yajna. We offer you with our heart. Please convey this message to the Brahmins. (75)