यजुर्वेद (अध्याय 19)
स्वा॒द्वीं त्वा॑ स्वा॒दुना॑ ती॒व्रां ती॒व्रेणा॒मृता॑म॒मृते॑न। मधु॑मतीं॒ मधु॑मता सृ॒जामि॒ सꣳसोमे॑न॒। सोमो॑ऽस्य॒श्विभ्यां॑ पच्यस्व॒ सर॑स्वत्यै पच्य॒स्वेन्द्रा॑य सु॒त्राम्णे॑ पच्यस्व ॥ (१)
हे ओषध देव! आप स्वादिष्ट, स्वादु, तीव्र व अमृतमय हैं. आप को मधु मिश्रित मधुर सोम के साथ मिला कर सृजित करते हैं. आप दोनों अश््विनीकुमारों के लिए पकने की कृपा करें. आप सरस्वती देवी के लिए पकने की कृपा करें. आप संरक्षक इंद्र देव के लिए पकने की कृपा करों. (१)
O God of Medicine! You are delicious, tasty, intense and elixir. You are created by mixing madhur with madhur som mixed with. Please cook for both of you Ashwinikumars. Please cook for Saraswati Devi. Please ripen for you patron Indra Dev. (1)
यजुर्वेद (अध्याय 19)
परी॒तो षि॑ञ्चता सु॒तꣳ सोमो॒ यऽउ॑त्त॒मꣳ ह॒विः। द॒ध॒न्वा यो नर्यो॑ऽअ॒प्स्वन्तरा सु॒षाव॒ सोम॒मद्रि॑भिः ॥ (२)
हे यजमानो! आप सोम को चारों ओर से उत्तम हवि से सीचिए. आप यजमानों के लिए नीति धारण कीजिए. सोम जल के बीच में हैं. पत्थरों से उस को कूट कर सांचा जाता है. (२)
O hosts! You see Som from all around with the best interest. You follow a policy for hosts. Som is in the middle of the water. It is crushed and moulded with stones. (2)
यजुर्वेद (अध्याय 19)
वा॒योः पू॒तः प॒वित्रे॑ण प्र॒त्यङ् सोमो॒ऽअति॑द्रुतः। इन्द्र॑स्य॒ युज्यः॒ सखा॑। वा॒योः पू॒तः प॒वित्रे॑ण प्राङ् सोमो॒ऽअति॑द्रुतः। इन्द्र॑स्य॒ युज्यः॒ सखा॑ ॥ (३)
बायु देव शुद्ध, पवित्र व अति तीव्र गति वाले हैं और इंद्र देव के साथ जुड़ते हैं. इंद्र देव के सखा हैं. वायु शुद्ध, पवित्र व बहुत द्रुत गति बाले हैं. इंद्र देव के सखा हैं.(३)
Bayu Dev is pure, pure and very fast and connects with Indra Dev. Indra is the friend of God. The air is pure, pure and very fast moving. Indra is the friend of God. (3)
यजुर्वेद (अध्याय 19)
पु॒नाति॑ ते परि॒स्रुत॒ꣳ सोम॒ꣳ सूर्य॑स्य दुहि॒ता। वारे॑ण॒ शश्व॑ता॒ तना॑ ॥ (४)
सोम पवित्र हैं. चारों ओर से स्रवित (झरते) होते हैं. सोम को पवित्र करते हैं. सूर्य की दुहिता पवित्र करती हैं. श्रद्धा तुम्हें पवित्र बनाती हैं. (४)
Som is holy. There are swarvits (waterfalls) from all sides. Sanctify Som. The sun sanctifies the sun. Faith makes you pure. (4)
यजुर्वेद (अध्याय 19)
ब्रह्म॑ क्ष॒त्रं प॑वते॒ तेज॑ऽइन्द्रि॒यꣳ सुर॑या॒ सोमः॑ सु॒तऽआसु॑तो॒ मदा॑य। शु॒क्रेण॑ देव दे॒वताः॑ पिपृग्धि॒ रसे॒नान्नं॒ यज॑मानाय धेहि ॥ (५)
हे सोम! आप पवित्र तेज झराइए. आप ब्राह्मणों व क्षत्रियों को पवित्र कीजिए. सोम इंद्रिय सामर्थ्य को प्रकट करता है. सरस हो कर सोम और अधिक आनंददायी हो जाता है. यह देवों का देव व चमकीला है. यह यजमानों के लिए रसमय अन्न धारण करता है. (५)
O Mon! You shine the holy light. Sanctify Brahmins and Kshatriyas. Soma reveals the power of the senses. Soma becomes more enjoyable by becoming sour. It is the god of gods and bright. It holds juicy food for the hosts. (5)
यजुर्वेद (अध्याय 19)
कु॒विद॒ङ्ग यव॑मन्तो॒ यवं॑ चि॒द्यथा॒ दान्त्य॑नुपू॒र्वं वि॒यूय॑। इ॒हेहै॑षां कृणुहि॒ भोज॑नानि॒ ये ब॒र्हिषो॒ नम॑ऽ उक्तिं॒ यज॑न्ति। उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽस्य॒श्विभ्यां॑ त्वा॒ सर॑स्वत्यै॒ त्वेन्द्रा॑य त्वा सु॒त्राम्ण॑ऽए॒ष ते॒ योनि॒स्तेज॑से त्वा वी॒र्याय त्वा॒ बला॑य त्वा ॥ (६)
अन्नवान किसान पहले ही अन्न को काट कर रख लेता है, ताकि उस में से पर्याप्त जौ निकल सके. ये यजमान कुश के आसन पर विराजमान हैं. यजमान नमस्कारपूर्वक यज्ञ करते हैं. अश्विनी देवों, सरस्वती देवी, संरक्षक इंद्र देव के लिए आप को उपयाम में ग्रहण किया गया है. बही आप का मूल निवास है. हम तेज, वीर्य व बल के लिए आप को यहां स्थापित करते हैं. (६)
The annawan farmer already cuts the grain and keeps it, so that enough barley can come out of it. These hosts are sitting on the seat of Kush. The host performs yagna with namaskar. For Ashwini Devas, Saraswati Devi, Patron Indra Dev, you have been eclipsed in Upyam. The book is your original residence. We set you up here for sharp, force. (6)
यजुर्वेद (अध्याय 19)
नाना॒ हि वां॑ दे॒वहि॑त॒ꣳ सद॑स्कृ॒तं मा सꣳसृ॑क्षाथां पर॒मे व्यो॑मन्। सुरा॒ त्वमसि॑ शु॒ष्मिणी॒ सोम॑ऽए॒ष मा मा॑ हिꣳसीः॒ स्वां योनि॑मावि॒शन्ती॑ ॥ (७)
आप नाना प्रकार से देवताओं का हित व श्रेष्ठ कार्य करने वाले हैं. आप परम व्योम में स्थित रहते हैं. सुरा तुम बलवती हो. यह सोम अलग स्वभाव का है. आप उस के मूल स्थान में प्रवेश करते हुए उस के प्रति हिंसा मत कीजिए. (७)
You are going to do the interest and best work of the gods in various ways. You live in Param Vyom. Sura, you are strong. This Som is of a different nature. Don't commit violence against him as you enter his native place. (7)
यजुर्वेद (अध्याय 19)
उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽस्याश्वि॒नं तेजः॑ सारस्व॒तं वी॒र्यमै॒न्द्रं बल॑म्। ए॒ष ते॒ योनि॒र्मोदा॑य त्वान॒न्दाय॑ त्वा॒ मह॑से त्वा ॥ (८)
सोम देव! आप उपयाम में ग्रहण किए गए हैं. अश्विनीकुमार के तेज के लिए व सरस्वती देवी के पराक्रम के लिए आप को स्थापित करते हैं. हमारे लिए वीर्य धारिए. (८)
Som Dev! You are eclipsed in the theorem. For the glory of Ashwinikumar, let us establish you for the might of Saraswati Devi. Hold semen for us. (8)