हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 19.7

अध्याय 19 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
नाना॒ हि वां॑ दे॒वहि॑त॒ꣳ सद॑स्कृ॒तं मा सꣳसृ॑क्षाथां पर॒मे व्यो॑मन्। सुरा॒ त्वमसि॑ शु॒ष्मिणी॒ सोम॑ऽए॒ष मा मा॑ हिꣳसीः॒ स्वां योनि॑मावि॒शन्ती॑ ॥ (७)
आप नाना प्रकार से देवताओं का हित व श्रेष्ठ कार्य करने वाले हैं. आप परम व्योम में स्थित रहते हैं. सुरा तुम बलवती हो. यह सोम अलग स्वभाव का है. आप उस के मूल स्थान में प्रवेश करते हुए उस के प्रति हिंसा मत कीजिए. (७)
You are going to do the interest and best work of the gods in various ways. You live in Param Vyom. Sura, you are strong. This Som is of a different nature. Don't commit violence against him as you enter his native place. (7)