हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 19.13

अध्याय 19 → मंत्र 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
दी॒क्षायै॑ रू॒पꣳ शष्पा॑णि प्राय॒णीय॑स्य॒ तोक्मा॑नि। क्र॒यस्य॑ रू॒पꣳ सोम॑स्य ला॒जाः सो॑मा॒शवो॒ मधु॑ ॥ (१३)
दीक्षा के लिए प्रायणीय (आरंभिक) जौ यज्ञ रूप हैं. खरीदे गए लाजा सोम के लिए कल्याणकारी व मधुमय हैं. (१३)
Barley is the sacrificial form for initiation. The lajas purchased are welfare and sweet for Som. (13)