यजुर्वेद (अध्याय 19)
वा॒य॒व्यैर्वाय॒व्यान्याप्नोति॒ सते॑न द्रोणकल॒शम्। कु॒म्भीभ्या॑मम्भृ॒णौ सु॒ते स्था॒लीभि॑ स्था॒लीरा॑प्नोति ॥ (२७)
वायव्यो से वायव्य की प्राप्ति होती है. सत् से द्रोणकलश की प्राप्ति होती है. कुंभियों से अंभूण की प्राप्ति होती है. स्थालियों से स्थाली की प्राप्ति होती है. (२७)
The northwest attains the north-west. Sat leads to dronakalsh. Aquarius gets the moon. Sthalis are obtained from the stables. (27)