हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 19.32

अध्याय 19 → मंत्र 32 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
सुरा॑वन्तं बर्हि॒षद॑ꣳ सु॒वीरं॑ य॒ज्ञꣳ हि॑न्वन्ति महि॒षा नमो॑भिः। दधा॑नाः॒ सोमं॑ दि॒वि दे॒वता॑सु॒ मदे॒मेन्द्रं॒ यज॑मानाः स्व॒र्काः ॥ (३२)
हम सुरावान, कुश के आसन पर स्थित व श्रेष्ठवीर को नमस्कारो से मनाते हैं. हम महिमाशाली यज्ञ को नमस्कारो से विस्तृत करते हैं. स्वर्गलोक में विद्यमान देवताओं के लिए सोम धारण करते हुए यजमान इंद्र देव को आनंदित करते और अत्यंत प्रसन्न होते हैं. (३२)
We celebrate Surawan, situated on the seat of Kush and the best hero with namaskars. We elaborate the glorious yajna with namaskars. While wearing soma for the gods present in heaven, the hosts enjoy Indra Dev and are very happy. (32)