हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 19.50

अध्याय 19 → मंत्र 50 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
अङ्गि॑रसो नः पि॒तरो॒ नव॑ग्वा॒ऽअथ॑र्वाणो॒ भृग॑वः सो॒म्यासः॑। तेषां॑ व॒यꣳ सु॑म॒तौ य॒ज्ञिया॑ना॒मपि॑ भ॒द्रे सौमन॒से स्या॑म ॥ (५०)
हमारे पितर अंगिरस हैं. नई वाणी के प्रेरक, अथर्वा, भृगु व सौम्य हैं. हम उन के प्रति सुमति वाले हैं. याजकों का कल्याण करें. उन के लिए समान मन बाले हों. (५०)
Our ancestors are Angiras. The motivators of the new speech are atharva, bhrigu and gentle. We are sympathetic to them. Welfare of priests. Have the same mind for them. (50)