हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 19.65

अध्याय 19 → मंत्र 65 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
योऽअ॒ग्निः क॑व्य॒वाह॑नः पि॒तॄन् यक्ष॑दृता॒वृधः॑। प्रेदु॑ ह॒व्यानि॑ वोचति दे॒वेभ्य॑श्च पि॒तृभ्य॒ आ ॥ (६५)
हे अग्नि! आप हवि वाहक हैं. आप सत्यमय यज्ञ की बढ़ोतरी करने वाले हैं. आप देवताओं व पितरों तक हवि प्रेषित करने की कृपा करें. (६५)
O agni! You are a Havi carrier. You are going to increase the satyamaya yajna. Please send havi to the gods and ancestors. (65)