यजुर्वेद (अध्याय 19)
इन्द्रः॑ सु॒त्रामा॒ हृद॑येन स॒त्यं पु॑रो॒डशे॑न सवि॒ता ज॑जान। यकृ॑त् क्लो॒मानं॒ वरु॑णो भिष॒ज्यन् मत॑स्ने वाय॒व्यैर्न मि॑नाति पि॒त्तम् ॥ (८५)
इंद्र देव सुरक्षक हैं. उन्होंने हदय से सत्य को जना, सविता देव ने पुरोडाश से सत्य को जना. वरुण देव ने ओषध से यकृत को ठीक किया. गले की नाड़ी को ठीक किया. वायु ने अस्थि और पित्त को यथावस्थित किया. (८५)
Indra Dev is a protector. He gave birth to truth from heart, Savita Dev gave birth to truth from Purodash. Varun Dev cured the liver with medicine. Fixed the pulse of the throat. Air restored bone and bile. (85)