यजुर्वेद (अध्याय 20)
प्रा॒ण॒पा मे॑ऽअपान॒पाश्च॑क्षु॒ष्पाः श्रो॑त्र॒पाश्च॑ मे। वा॒चो मे॑ वि॒श्वभे॑षजो॒ मन॑सोऽसि वि॒लाय॑कः ॥ (३४)
हे ओषधे! आप हमारे प्राण, अपान, नेत्र, कर्ण और वाणी रक्षक हैं, आप सब के वैद्य हैं. आप मन का विलय करने की कृपा करें. (३४)
O doctor! You are the protector of our soul, apana, eye, ear and speech, the physician of all of you. Please merge your mind. (34)