यजुर्वेद (अध्याय 22)
तेजो॑ऽसि शु॒क्रम॒मृत॑मायु॒ष्पाऽआयु॑र्मे पाहि। दे॒वस्य॑ त्वा सवि॒तुः प्र॑स॒वेऽश्विनो॑र्बा॒हुभ्यां॑ पू॒ष्णो हस्ता॑भ्या॒माद॑दे ॥ (१)
हे देव! आप तेजोमय, चमकीले, अमर व आयु की रक्षा करने वाले हैं. आप हमारी आयु की रक्षा कीजिए. सविता देव और अश्विनीकुमार की बाहु तथा पूषा देव के हाथों आप हम पर कृपा दान कीजिए. (१)
O God! You are bright, bright, immortal and protecting the age. You protect our age. You give us grace at the hands of Savita Dev and Ashwinikumar's bahu and Pusha Dev. (1)
यजुर्वेद (अध्याय 22)
इ॒माम॑गृभ्णन् रश॒नामृ॒तस्य॒ पूर्व॒ऽआयु॑षि वि॒दथे॑षु क॒व्या। सा नो॑ऽअ॒स्मिन्त्सु॒तऽआब॑भूवऽऋ॒तस्य॒ साम॑न्त्स॒रमा॒रप॑न्ती ॥ (२)
कवियों ने यज्ञ से ज्ञान पाया. ज्ञान से सृष्टि व आयु को जाना. वे हमारे पुत्रों के लिए ऋत को जानें. प्रकृति के रहस्यों को जान जाएं. (२)
Poets got knowledge from yajna. Knowing creation and age through knowledge. They know Rita for our sons. Know the secrets of nature. (2)
यजुर्वेद (अध्याय 22)
अ॒भि॒धाऽअ॑सि॒ भुव॑नमसि य॒न्तासि॑ ध॒र्त्ता। स त्वम॒ग्निं वै॑श्वान॒रꣳ सप्र॑थसं गच्छ॒ स्वाहा॑कृतः ॥ (३)
हे अश्व! आप दोनों लोकों के धारक, भुवन, नियंत्रक व धारक हैं. आप वैश्वानर अग्नि में आहुति दीजिए. आप आहुतिपूर्वक अपने निर्धारित स्थान तक पहुंचने की कृपा कीजिए. (३)
O horse! You are the holder, bhuvan, controller and holder of both the worlds. You sacrifice in the vaishvanar agni. Please reach your designated place with respect. (3)
यजुर्वेद (अध्याय 22)
स्व॒गा त्वा॑ दे॒वेभ्यः॑ प्र॒जाप॑तये॒ ब्रह्म॒न्नश्वं॑ भ॒न्त्स्यामि॑ दे॒वेभ्यः॑ प्र॒जाप॑तये॒ तेन॑ राध्यासम्। तं ब॑धान दे॒वेभ्यः॑ प्र॒जाप॑तये॒ तेन॑ राध्नुहि ॥ (४)
आप सर्वत्र गमन करने वाले हैं. आप देवों तक स्वयं जाने वाले हैं. आप प्रजापति तक पहुंचने बाले हैं. अग्नि ब्रहाज्ञानी हैं. हम आप से देवताओं तक पहुंचने की प्रार्थना करते हैं. देवता और प्रजापति हमें सब प्रकार के धन प्रदान करने की कृपा करों. (४)
You are going to go everywhere. You are going to go to the gods yourself. You are going to reach Prajapati. Agni is a brahmagyan. We pray to you to reach out to the gods. May the gods and prajapatis please provide us with all kinds of wealth. (4)
यजुर्वेद (अध्याय 22)
प्र॒जाप॑तये त्वा॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मीन्द्रा॒ग्निभ्यां॑ त्वा॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मि वा॒यवे॑ त्वा॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मि॒ विश्वे॑भ्यस्त्वा दे॒वेभ्यो॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मि॒ सर्वे॑भ्यस्त्वा दे॒वेभ्यो॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मि। योऽअर्व॑न्तं॒ जिघा॑सति॒ तम॒भ्यमीति॒ वरु॑णः। प॒रो मर्त्तः॑ प॒रः श्वा ॥ (५)
प्रजापति सब के प्रिय हैं. हम प्रजापति की संतुष्टि हेतु आप का अभिषेक करते हैं. इंद्र और अग्नि की संतुष्टि हेतु आप का अभिषेक करते हैं. हम वायु की संतुष्टि हेतु आप का अभिषेक करते हैं. हम विशवे देव की संतुष्टि हेतु आप का अभिषेक करते हैं. हम सभी देवों की संतुष्टि हेतु आप का अभिषेक करते हैं. यज्ञ की जो चंचल ऊंची उठती हुई लपटें हैं उन्हें जो भी हानि पहुंचाने वाले हों, उन्हें बरुण देव नष्ट करने की कृपा करें. यज्ञ को नुकसान पहुंचाने वाले कुत्तों और ऐसे व्यक्तियों को दूर पहुंचाने की कृपा करें. (५)
Prajapati is loved by all. We consecrate you for Prajapati's satisfaction. For the satisfaction of Indra and Agni, they anoint you. We consecrate you for the satisfaction of the air. We consecrate you for the satisfaction of Vishve Dev. We consecrate you for the satisfaction of all gods. Please destroy the fickle high flames of yajna who are going to cause harm to them. Please take away dogs and such persons who harm the yajna. (5)
यजुर्वेद (अध्याय 22)
अ॒ग्नये॒ स्वाहा॒ सोमा॑य॒ स्वाहा॒पां मोदा॑य॒ स्वाहा॑ सवि॒त्रे स्वाहा॑ वा॒यवे॒ स्वाहा॒ विष्ण॑वे॒ स्वाहेन्द्रा॑य॒ स्वाहा॒ बृह॒स्पत॑ये॒ स्वाहा॑ मि॒त्राय॒ स्वाहा॒ वरु॑णाय॒ स्वाहा॑ ॥ (६)
अग्नि के लिए स्वाहा. सोम के लिए स्वाहा. प्रसन्नता के लिए स्वाहा. सविता के लिए स्वाहा. वायु के लिए स्वाहा. विष्णु के लिए स्वाहा. इंद्र के लिए स्वाहा. बृहस्पति के लिए स्वाहा. मित्र के लिए स्वाहा. बरुण के लिए स्वाहा. (६)
Swaha for agni. Swaha for Mon. Swaha for pleasure. Swaha for Savita. Swaha for air. Swaha for Vishnu. Swaha for Indra. Swaha for Jupiter. Swaha for a friend. Swaha for Barun. (6)
यजुर्वेद (अध्याय 22)
हि॒ङ्का॒राय॒ स्वाहा॒ हिङ्कृ॑ताय॒ स्वाहा॒ क्रन्द॑ते॒ स्वाहा॑ऽवक्र॒न्दाय॒ स्वाहा॒ प्रोथ॑ते॒ स्वाहा॑ प्रप्रो॒थाय॒ स्वाहा॑ ग॒न्धाय॒ स्वाहा॑ घ्रा॒ताय॒ स्वाहा॒ निवि॑ष्टाय॒ स्वाहोप॑विष्टाय॒ स्वाहा॒ सन्दि॑ताय॒ स्वाहा॒ वल्ग॑ते॒ स्वाहासी॑नाय॒ स्वाहा॒ शया॑नाय॒ स्वाहा॒ स्वप॑ते॒ स्वाहा॒ जाग्र॑ते॒ स्वाहा॒ कूज॑ते॒ स्वाहा॒ प्रबु॑द्धाय॒ स्वाहा॑ वि॒जृम्भ॑माणाय॒ स्वाहा॒ विचृ॑ताय॒ स्वाहा॒ सꣳहा॑नाय॒ स्वाहोप॑स्थिताय॒ स्वाहाऽय॑नाय॒ स्वाहा॒ प्राय॑णाय॒ स्वाहा॑ ॥ (७)
हिंकार के लिए स्वाहा. हिंकृत के लिए स्वाहा. क्रंदन के लिए स्वाहा. अवक्रंदन के लिए स्वाहा. कार्य शुरू करने के लिए स्वाहा. कार्य समाप्त करने के लिए स्वाहा. गंध के लिए स्वाहा. सूंघने के लिए स्वाहा. स्थित के लिए स्वाहा. बैठने के लिए स्वाहा. स्थिर के लिए स्वाहा. गतिमान के लिए स्वाहा. आसन ग्रहण करने के लिए स्वाहा. सोने के लिए स्वाहा. जाग्रत के लिए स्वाहा. कूजने के लिए स्वाहा. प्रबुद्ध के लिए स्वाहा. जम्हा के लिए स्वाहा. चैतन्य होने के लिए स्वाहा. उपस्थित के लिए स्वाहा. आगमन के लिए स्वाहा. गमन के लिए स्वाहा. (७)
Swaha for hinkar. Swaha for Hinkrit. Swaha for crying. Swaha for degradation. Swaha to start the work. Swaha to finish the task. Swaha for smell. Swaha to smell. Swaha for located. Swaha to sit. Swaha for the stable. Swaha for moving. Swaha to take the asana. Swaha to sleep. Swaha for awakening. Swaha to kuj. Swaha for the enlightened. Swaha for yawn. Swaha to be conscious. Swaha for present. Swaha for arrival. Swaha for the journey. (7)
यजुर्वेद (अध्याय 22)
य॒ते स्वाहा॒ धाव॑ते॒ स्वाहो॑द्द्रा॒वाय॒ स्वाहोद्द्रु॑ताय॒ स्वाहा॑ शूका॒राय॒ स्वाहा॒ शूकृ॑ताय॒ स्वाहा॒ निष॑ण्णाय॒ स्वाहोत्थि॑ताय॒ स्वाहा॑ ज॒वाय॒ स्वाहा॒ बला॑य॒ स्वाहा॑ वि॒वर्त्त॑मानाय॒ स्वाहा॒ विवृ॑त्ताय॒ स्वाहा॑ विधून्वा॒नाय॒ स्वाहा॒ विधू॑ताय॒ स्वाहा॒ शुश्रू॑षमाणाय॒ स्वाहा॑ शृण्व॒ते स्वाहेक्ष॑माणाय॒ स्वाहे॑क्षि॒ताय॒ स्वाहा॒ वीक्षिताय॒ स्वाहा॑ निमे॒षाय॒ स्वाहा॒ यदत्ति॒ तस्मै॒ स्वाहा॒ यत् पिब॑ति॒ तस्मै॒ स्वाहा॒ यन्मूत्रं॑ क॒रोति॒ तस्मै॒ स्वाहा॑ कुर्व॒ते स्वाहा॑ कृ॒ताय॒ स्वाहा॑ ॥ (८)
जाते हुए के लिए स्वाहा. दौड़ते हुए के लिए स्वाहा. उत्कर्षशील के लिए स्वाहा. उत्कर्ष हेतु गतिमान के लिए स्वाहा. बैठे हुए के लिए स्वाहा. उठे हुए के लिए स्वाहा. वेगवान के लिए स्वाहा. बल के लिए स्वाहा. बारबार किए जाने के लिए स्वाहा. बारबार किए गए के लिए स्वाहा. कांपने वाले के लिए स्वाहा. कांपने के लिए स्वाहा. सुनने की इच्छा वाले के लिए स्वाहा. सुनने के लिए स्वाहा. देखने के लिए स्वाहा. देख चुके के लिए स्वाहा. देखनेपरखने के लिए स्वाहा. पलक झपकाने के लिए स्वाहा. जो खाता है, उस के लिए स्वाहा. जो पीता है, उस के लिए स्वाहा. जो मूत्र विसर्जित करता है, उस के लिए स्वाहा. करने बाले के लिए स्वाहा. कर चुके के लिए स्वाहा. (८)
Swaha for the sake of leaving. Swaha for running. Swaha for the uplifting. Swaha for the speed of excellence. Swaha for sitting. Swaha for the rise. Swaha for the fast. For the sake of force. To be repeated. For repeated references. For those who tremble. Swaha for trembling. For those who want to listen. Listen to it. Swaha to see. For those who have seen it. Look at it. Swaha for blinking the eyelids. For those who eat, love it. For the one who drinks, for him. For the one who dissolves urine, swaha. For the sake of doing it. For the one who has done it. (8)