यजुर्वेद (अध्याय 22)
इ॒माम॑गृभ्णन् रश॒नामृ॒तस्य॒ पूर्व॒ऽआयु॑षि वि॒दथे॑षु क॒व्या। सा नो॑ऽअ॒स्मिन्त्सु॒तऽआब॑भूवऽऋ॒तस्य॒ साम॑न्त्स॒रमा॒रप॑न्ती ॥ (२)
कवियों ने यज्ञ से ज्ञान पाया. ज्ञान से सृष्टि व आयु को जाना. वे हमारे पुत्रों के लिए ऋत को जानें. प्रकृति के रहस्यों को जान जाएं. (२)
Poets got knowledge from yajna. Knowing creation and age through knowledge. They know Rita for our sons. Know the secrets of nature. (2)