हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 26.24

अध्याय 26 → मंत्र 24 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
अ॒मेव॑ नः सुहवा॒ऽआ हि गन्त॑न॒ नि ब॒र्हिषि॑ सदतना॒ रणि॑ष्टन।अथा॑ मदस्व जुजुषा॒णो ऽअन्ध॑स॒स्त्वष्ट॑र्दे॒वेभि॒र्जनि॑भिः सु॒मद्ग॑णः ॥ (२४)
हे देव पत्नियो! आप इस यज्ञ मंडप को अपने घर की तरह समझिए. हम आप का आह्यान करते हैं. आप पधार कर कुश के आसन पर विराजिए. आप आनंदित होइए. आप हवि को ग्रहण करने की कृपा कीजिए. (२४)
O god wives! You should consider this Yajna Mandap as your home. We call on you. You come and sit on the seat of Kush. You be happy. Please accept Havi. (24)