यजुर्वेद (अध्याय 27)
मध्वा॑ य॒ज्ञं न॑क्षसे प्रीणा॒नो नरा॒शꣳसो॑ऽ अग्ने। सु॒कृद्दे॒वः स॑वि॒ता वि॒श्ववा॑रः ॥ (१३)
हे अग्नि! आप को प्राणी यज्ञ में मधु (आदि सामग्रियों से) पूजते हैं. आप सर्वप्रिय हैं. आप श्रेष्ठ कार्य करने वाले हैं. आप सभी को प्रिय लगते हैं. (१३)
O agni! You are worshiped by animals in the yagna with honey (etc. You are all-love. You're going to do the best. You seem dear to everyone. (13)