यजुर्वेद (अध्याय 28)
अ॒ग्निम॒द्य होता॑रमवृणीता॒यं यज॑मानः॒ पच॒न् पक्तीः॒ पच॑न् पुरो॒डाशं॑ ब॒ध्नन्निन्द्रा॑य॒ च्छाग॑म्। सू॒प॒स्थाऽ अ॒द्य दे॒वो वन॒स्पति॑रभव॒दिन्द्रा॑य॒ च्छागे॑न।अद्य॒त्तं मे॑द॒स्तः प्रति॑ पच॒ताग्र॑भी॒दवी॑वृधत् पुरो॒डाशे॑न त्वाम॒द्य ऋ॑षे ॥ (२३)
अग्नि ने आज होता का वरण किया. पचने योग्य वस्तु व पुरोडाश को पकाया. इंद्र देव के लिए बकरी को बांधा. आज वनस्पति देव ने बकरी के दूध से इंद्र देव की बढ़ोतरी की. आज पुरोडाश पका कर उस से उन की बढ़ोतरी की. हे ऋषि गणो! आप भी ऐसा करने की कृपा कीजिए. (२३)
Agni made up for it today. Cook the digestible and pulp. Indra tied the goat to Dev. Today, the vanaspati dev increased Indra Dev with goat's milk. Please do the same. (23)