यजुर्वेद (अध्याय 28)
होता॑ यक्ष॒त् स्वाहा॑कृतीर॒ग्निं गृ॒हप॑तिं॒ पृथ॒ग्वरु॑णं भेष॒जं कविं॑ क्ष॒त्रमिन्द्रं॑ वयो॒धस॑म्।अति॑च्छन्दसं॒ छन्द॑ऽइन्द्रि॒यं बृ॒हदृ॑ष॒भं गां वयो॒ दध॒द् व्यन्त्वाज्य॑स्य॒ होत॒र्यज॑ ॥ (३४)
होता अग्नि के लिए यज्ञ करते हैं. अग्नि बलवान, आयुधारी, गृहपति, वैद्य, कवि व स्वाहायुक्त हैं. हम छंदस छंद से अग्नि और इंद्र देव की उपासना करते हैं. दोनों देव हवि स्वीकारने की कृपा करें. हम इंद्रिय शक्ति से उन की उपासना करते हैं. यजमान दोनों देवों के लिए यज्ञ करें. (३४)
They perform yajna for agni. Agni is strong, aged, housewife, vaidya, poet and swahayukta. We worship Agni and Indra Dev from the verses. Please accept both gods and sisters. We worship them with sense power. The host should perform yajna for both the gods. (34)