यजुर्वेद (अध्याय 28)
होता॑ यक्ष॒दोजो॒ न वी॒र्यꣳ सहो॒ द्वार॒ऽ इन्द्र॑मवर्द्धयन्।सु॒प्रा॒य॒णाऽ अ॒स्मिन् य॒ज्ञे वि श्र॑यन्ता॒मृता॒वृधो॒ द्वार॒ इन्द्रा॑य मी॒ढुषे॒ व्यन्त्वाज्य॑स्य॒ होत॒र्यज॑ ॥ (५)
होता ने इंद्र देव हेतु यज्ञ किया. उन्होंने उन की बढ़ोतरी की एवं उन के ओज और वीर्य की बढ़ोतरी की. इस अज्ञ में यज्ञ को बढ़ाने वाले द्वार की ओर देवता अच्छी तरह प्रयाण करें. चे इच्छापूर्ति करने बाले हैं. वे यज्ञ में पधारें. अमृत स्वरूप हवि को ग्रहण करने की कृपा करें. हम उन के लिए यज्ञ करते हैं. होता उन के लिए यज्ञ कीजिए. (५)
Hota performed yajna for Indra Dev. He increased them and increased their weight and semen. They are wishful. They come to the yagna. Please take havi as nectar. We perform yagna for them. Do yajna for them. (5)