हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 29.6

अध्याय 29 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
अ॒न्त॒रा मि॒त्रावरु॑णा॒ चर॑न्ती॒ मुखं॑ य॒ज्ञाना॑म॒भि सं॑विदा॒ने।उ॒षासा॑ वासुहिर॒ण्ये सु॑शि॒ल्पेऽऋ॒तस्य॒ योना॑वि॒ह सा॑दयाभि ॥ (६)
हे रात्रि और उषा देवी! आप स्वर्णमयी, श्रेष्ठ शिल्पी व ऋत की योनि हैं. हम यहां आप को स्थापित करते हैं. आप मित्र देव और वरुण देव के बीच भ्रमण करती हैं. आप यज्ञ का मुख हैं. आप यज्ञ को ज्योतित (प्रकाशित) करने वाली हैं. (६)
O Ratri and Usha Devi! You are the golden, the best craftsman and the vagina of the heart. We install you here. You travel between friends Dev and Varun Dev. You are the mouth of the yajna. You are going to light the yajna. (6)