यजुर्वेद (अध्याय 3)
आयं गौः पृश्नि॑रक्रमी॒दस॑दन् मा॒तरं॑ पु॒रः। पि॒तरं॑ च प्र॒यन्त्स्वः॑ ॥ (६)
अग्नि देव सर्वत्र भ्रमणशील व बहुरंगी लपटों वाले हैं. वह पृथ्वी माता के पास आसन पर विराजमान हैं. यज्ञ में वह प्रयलपूर्वक स्वर्गलोक पिता के पास पहुंच गए हैं. (६)
Agni Dev is everywhere in a moving and multi-colored flames. He is sitting on a seat near Mother Earth. In the yajna, he has reached heavenly father. (6)